May 26, 2022

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

कृषि सुधार कानूनों की आलोचना विपक्ष की ‘बौद्धिक बेईमानी’, ‘राजनीतिक धोखाधड़ी’ : मोदी

नयी दिल्ली (एजेंसी), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर उनकी सरकार की आलोचना को विपक्ष की ‘बौद्धिक बेईमानी’ और राजनीतिक ‘धोखाधड़ी’ करार दिया और कहा कि नागरिकों को जो सुविधाएं दशकों पहले मिल जानी चाहिए थीं, वे सुविधाएं उन्हें दिलाने के लिए सख्त और बड़े फैसले करने की आवश्यकता है। कृषि कानूनों का मजबूती से बचाव करते हुए मोदी ने कहा कि कोई राजनीतिक दल एक वादा करे और उसे पूरा ना कर सके तो यह एक बात है, लेकिन ‘खास तौर पर अवांछित’ और ‘घृणित’ बात यह है कि इनमें से कुछ दलों ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों की तर्ज पर ही सुधार के वादे किए थे और अब उन्होंने ‘यू-टर्न’ ले लिया है और ‘जो वादे उन्होंने किए थे, उन्हीं के बारे में वह सबसे द्वेषपूर्ण दुष्प्रचार कर रहे हैं’। ‘ओपन’ पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘भारत के लोग जिन चीजों के हकदार हैं, जिन सुविधाओं को उन्हें दशकों पूर्व मिल जाना चाहिए था, वह उन तक नहीं पहुंच सकी हैं। भारत अब वैसी स्थिति में नहीं है कि वह इन सुविधाओं के लिए अब और लंबा इंतजार करे। हमें उन्हें यह देना होगा और इसके लिए बड़े फैसले लेने चाहिए। जरूरत पड़ी तो सख्त निर्णय भी किए जाने चाहिए।’ प्रधानमंत्री उनकी सरकार द्वारा लाए गए श्रम और कृषि कानूनों और किसान संगठनों की इन विवादास्पद कानूनों को वापस लेने की मांगों को सरकार द्वारा खारिज किए जाने के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। सत्ताधारी भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों की तर्ज पर ही कृषि सुधार के वादे किए थे लेकिन स्वार्थवश राजनीतिक कारणों से वह नए कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों का एक वर्ग इन कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने की मांग को लेकर लगभग 10 महीने से राजधानी दिल्ली की विभिन्न सीमाओं व देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल, इन कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगी हुई है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि उनकी सरकार शुरू से ही प्रदर्शकारी किसान संगठनों से वार्ता करने और कानूनों में आपत्ति वाले मुद्दों पर चर्चा को तैयार है। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में कई बैठकें भी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई भी आपत्ति से संबंधित किसी एक विशेष मुद्दे को लेकर नहीं आया है और न ही कहा है कि वह यह बदलाव विशेष चाहते हैं।’