July 1, 2022

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

11500 हज़ार फीट की ऊंचाई पर सामरिक महत्व की जोजिला टनल का काम शुरू

  • केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी बने गवाह, 6809 करोड़ रुपए से बनेगी आधुनिक सुरंग

जम्मू, चीन सीमा तक सारा साल रास्ता खुला रखने के लिये सामरिक महत्व की जोजिला टनल का काम आज शुरू हो गया। लद्दाख के कारगिल जिले में आज पहाड़ में ब्लास्ट के साथ जोजिला टनल का काम शुरू हो गया है। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे। ब्लास्ट के बाद केंद्रीय मंत्री गडकरी ने जोजिला टनल पर एक किताब का भी विमोचन किया। इस टनल को बनाने में केंद्र सरकार 6809 करोड़ रुपए खर्च करेगी। कारगिल जिले के द्रास और सोनमर्ग के बीच प्रस्तावित जोजिला टनल के निर्माण के लिए आज दोपहर करीब 12 बजे ब्लास्ट किया गया। करीब 11578 फीट की ऊंचाई पर बनने वाली ये टनल बेहद आधुनिक होगी। इस टनल की लंबाई 14.15 किलोमीटर होगी। कारगिल में बनने वाली जोजिला टनल हर लिहाज से दुनिया के सबसे आधुनिक सुरंगों में से एक होगी।

3 घंटे की दूरी 15 मिनट में होगी पूरी

कारगिल के जोजिला दर्रे को दुनिया का सबसे खतरनाक दर्रा माना जाता। टनल के बनने से एक तो इसे पार करने का जोखिम कम होगा और जो दूरी को तय करने में तीन घंटे लगते थे वो महज 15 मिनट में पूरी हो जाएगी। जोजिला सुरंग, श्रीनगर, कारगिल और लेह को आपस में जोड़ने में मददगार होगी। सुरंग से सेना को न सिर्फ चीन सीमा बल्कि पाकिस्तान की सीमा पर भी जवानों की तैनाती में मदद मिलेगी। जोजिला टनल का निर्माण सेना और सिविल इंजीनियरों की एक टीम पहाड़ को काट कर इस सुरंग बनाएगी। इस सुरंग के बन जाने से से श्रीनगर और लेह के बीच पूरे वर्ष भर संपर्क सुविधा मिलेगी।

14.5 किलोमीटर होगी लंबाई

जोजिला टनेल की खासियत यह है कि श्रीनगर कारगिल लेह नेशनल हाईवे पर 11, 578 फीट ऊंचाई पर बनने वाली इस टनल की कुल लंबाई करीब 14.5 किलोमीटर है। राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर श्रीनगर घाटी और लेह के बीच यह सुरंग द्रास और कारगिल होते हुए सभी मौसम में संपर्क सुविधा उपलब्ध कराएगी। अगर मौजूदा समय की बात करें तो इस रूट पर आवागमन सिर्फ 6 महीने उपलब्ध रहता है। लद्दाख, गिलगिट और बालटिस्तान के करीब होने से इसका सामरिक महत्व भी है। यह दुनिया में वाहनों के परिचालन के लिहाज से सवार्धिक खतरनाक मार्गों में से एक है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद भारत की न केवल आर्थिक क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि सामरिक क्षमका में भी वृद्धि होगी।