June 30, 2022

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

बिना बहस विधेयक पारित होना गंभीर मुद्दा : कोर्ट

यूरेशिया संवाददाता

नयी दिल्ली,  (एजेंसी)।निरस्त कर दिये गये प्रावधानों के साथ न्यायाधिकरण संबंधी विधेयक को संसद में बिना चर्चा के पारित किये जाने को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ‘गंभीर मुद्दा’ करार दिया। अदालत ने केंद्र को अर्ध-न्यायिक पैनलों में नियुक्तियां करने के लिए 10 दिन का समय दिया, क्योंकि इन निकायों में पीठासीन अधिकारियों तथा न्यायिक एवं तकनीकी सदस्यों की बड़ी कमी है।न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2021 का संबंध विभिन्न न्यायाधिकरणों के सदस्यों की सेवा एवं कार्यकाल संबंधत शर्तों से है। नये कानून में उन कुछ प्रावधानों को बहाल कर दिया गया है, जिन्हें जस्टिस एलएन राव की अगुवाई वाली पीठ ने हाल में अर्जियों पर सुनवाई करते हुए खारिज कर दिया था। उनमें एक अर्जी मद्रास बार एसोसिएशन ने दायर की थी। चीफ जस्टिस एनवी रमण ने कहा, ‘संसद को कोई भी कानून बनाने का अधिकार है। लेकिन हमें यह अवश्य पता चलना चाहिए कि अध्यादेश के खारिज हो जाने के बाद फिर इस विधेयक को लाने के लिए सरकार के सामने कौन से कारण थे?’मैंने अखबारों में पढ़ा और वित्त मंत्री की बात सुनी और वह बस एक शब्द था कि अदालत ने संवैधानिकता के आधार पर इस अध्यादेश को खारिज नहीं किया है।’