July 3, 2022

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

सुशांत केसः आत्महत्या के एंगल से आगे बढ़ेगी CBI की जांच, मगर विकल्प खुले

इस केस में जो फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई है, वो कुछ ऐसी ही है. रिपोर्ट के मुताबिक सुशांत ने अपने बेडरूम के अंदर गले में फंदा लगा कर खुदकुशी की थी और खुदकुशी से पहले उन्होंने अपना कमरा अंदर से बंद कर लिया था.

मौत के जिस मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया, दो-दो राज्यों की पुलिस के बाद तीन-तीन टॉप एजेंसीज़ को जिसकी जांच अपने हाथ में लेनी पड़ी. जिस मौत को हत्या बताकर पटना से मुंबई तक महीनों सियासी बवाल होता रहा. जब उस मामले की फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई, तो मामला खुदकुशी का निकला. जी हां, ठीक 111 दिन यानी साढ़े तीन महीने बाद फिल्म स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत का खुलासा आखिरकार हो ही गया.

इस मामले में जो फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आई है, वो कुछ ऐसी ही है. रिपोर्ट के मुताबिक सुशांत ने अपने बेडरूम के अंदर गले में फंदा लगा कर खुदकुशी की थी और खुदकुशी से पहले उन्होंने अपना कमरा अंदर से बंद कर लिया था.

सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद फोरेंसिक इनवेस्टिगेशन के लिए एम्स के फोरेंसिक डिपार्टमेंट से मदद मांगी थी. एम्स के एक्सपर्ट्स ने सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन तो किया ही, मुंबई के कूपर अस्पताल के उन डॉक्टरों से भी मुलाकात की, जिन्होंने सुशांत का पोस्टमार्टम किया था. साथ ही मुंबई के ही कलीना लैब के एक्सपर्ट्स से बातचीत करने के साथ-साथ सुशांत के विसरा की भी दोबारा जांच की. और तो और इस टीम की अगुवाई में ही सीबीआई ने सुशांत के कमरे में सुशांत जितनी वज़न वाले एक डमी के साथ सीन ऑफ़ क्राइम को रिक्रिएट भी किया और तब ये टीम इस नतीजे पर पहुंची कि सुशांत की मौत खुदकुशी से अलग कुछ भी नहीं.

हालांकि सीबीआई को अपनी रिपोर्ट सौंपने के साथ-साथ फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने ये साफ कर दिया था कि इस मामले के दूसरे पहलुओं की तफ्तीश के बाद सीबीआई ही ये आखिरी फैसला करेगी कि मामला खुदकुशी का है या फिर कुछ और? और सीबीआई ने आख़िरकार वो फैसला कर ही लिया. वो इस नतीजे पर पहुंच गई कि मामला खुदकुशी का ही है. सीबीआई ने फोरेंसिक सबूतों को ध्यान में रखने के साथ-साथ जो दूसरे परिस्थितिजन्य साक्ष्य इकट्ठा किए, उन्होंने भी यही ईशारा किया सुशांत की मौत के पीछे कोई साज़िश नहीं है.

एम्स की मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर जो ऑब्ज़र्वेशन पेश की वो मुंबई के कूपर अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलती-जुलती रही. मुंबई की कलीना फोरेंसिक लैब ने सुशांत की विसरा जांच की जो रिपोर्ट दी थी, एम्स के एक्सपर्ट्स ने जब विसरा की जांच की, तो वही बात सामने आई. मुंबई और दिल्ली की दोनों ही विसरा रिपोर्ट के मुताबिक मौत से पहले सुशांत को ज़हर जैसी कोई चीज़ नहीं दी गई. इसी के साथ ज़हर वाली साज़िश की बात भी ख़त्म हो गई.

सीबीआई ने सुशांत का लैपटॉप, हार्ड डिस्क, एक कैनन कैमरा और दो मोबाइल फ़ोन भी ज़ब्त किए थे, जिनकी फॉरेंसिक जांच की गई और इसमें भी कोई साज़िश सामने नहीं आई. मामले के आरोपियों समेत कुल 20 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ हुई और सबके बयानों की अलग से जांच की गई, इसमें भी कुछ गड़बड़ीवाली बात सामने नहीं आई.

इतना ही नहीं फॉरेंसिक जांच में सुशांत के गले के अलावा और कहीं कोई चोट के निशान भी नहीं मिले. ठीक इस तरह कपड़ों में भी कोई ज़ोर जबरदस्ती के सबूत नहीं थे. यहां तक कि गले के लिगेचर मार्क को लेकर भी सीबीआई के फोरेंसिक एक्सपर्टस को किसी तरह के कोई शक वाली बात नज़र नहीं आई.

ऐसे में अब सीबीआई ने फिलहाल मामले की जांच खुदकुशी वाले एंगल से ही आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है. इस मामले में सुशांत के घरवालों की शिकायत पर पहले ही उसकी गर्लफ्रेंड रिया के साथ-साथ उसके घरवालों के खिलाफ़ सुशांत को खुदकुशी के लिए मजबूर करने की एफआईआर दर्ज है. अब जब ये साफ़ हो गया कि मामला खुदकुशी का है, सीबीआई अपनी तफ्तीश में ये पता करने की कोशिश करेगी कि वाकई सुशांत की खुदकुशी के लिए रिया और उसके घरवाले कितने जिम्मेदार हैं.

हालांकि सीबीआई ने ये भी साफ़ कर दिया है कि मामले की तफ्तीश में आगे भी सारे ऑप्शन खुले रहेंगे, अगर कोई साज़िश जैसी बात सामने आएगी, तो वो मामले को खुदकुशी के लिए उकसाने से बदले आईपीसी की धारा 302 के तहत क़त्ल में भी तब्दील कर सकती है.