January 19, 2021

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

हर बच्चा एक हुनर के साथ जन्म लेता है, जरूरत है उस हुनर को तलाशने और तराशने की

डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर जयंती

परिवार और पाठशाला दोनों का महत्वपूर्ण योगदान -स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश,  परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने संदेश में कहा कि जीवन का हर दिन एक नया संदेश, नया अवसर और नयी चुनौतियों को लेकर आता है, वैसे ही जो दिन बीत जाता है, वह हमें एक शिक्षा दे जाता है। भारत का गौरवशाली इतिहास जिसमें अनेक ऐसे रत्न हैं, जिनके जीवन से शिक्षा लेकर सब अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं। डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर भारत के ऐसे ही अनमोल रत्न है जिनके आविष्कारों को खगोल विज्ञान की रीढ़ माना जाता है, आज उनकी जयंती पर उनकी राष्ट्र सेवा को नमन।
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी विचारधारा को समर्पित जीवन जीने वाली दीदी निर्मला देशपांडे जी का आज जन्मदिवस है। उन्होंने अपना पूरा जीवन साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने, महिलाओं, आदिवासियों वंचितों की सेवा में समर्पित कर दिया, आज वे हमारे बीच सशरीर नहीं है परन्तु उनकी सेवाओं के लिये उन्हें हमेशा याद किया जायेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हर बच्चा एक हुनर के साथ जन्म लेता है, जरूरत है उस हुनर को तलाशने और तराशने की। बच्चों के हुनर को तराशने हेतु परिवार और पाठशाला दोनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। छोटे-छोटे बच्चों को संस्कार और शिक्षा के साथ आत्मविश्वास जागृत करने वाले विचार देना नितांत आवश्यक है।
स्वामी जी ने कहा कि दुनिया का इतिहास उठा कर देखें तो हम पायेंगे की वह कुछ आत्मविश्वासी लोगों के द्वारा बनायी गयी सुदृढ़ इमारत है और कुछ ऐसे लोगों की कहानियां हैं जिन्हें खुद पर विश्वास था, उस विश्वास, मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने इतिहास रच दिया। हर बच्चा इस पथ पर आगे बढ़ सकता है, जरूरत है धैर्य, लगन और समर्पण की।
स्वामी जी ने कहा कि बचपन से ही बच्चों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और राष्ट्र को समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा दी जानी चाहिये। उन्हें भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखने और उसकी रक्षा करने की शिक्षा देना नितांत आवश्यक है, क्योंकि देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे। स्वामी जी ने देश के युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि देश की रक्षा और सेवा करने के लिये हमेशा तत्पर रहें। स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण हेतु भी अपना योगदान प्रदान करें।
डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर विख्यात भारतीय-अमेरिकी खगोलशास्त्री थे। भौतिक शास्त्र पर उनके अध्ययन के लिए उन्हें विलियम ए. फाउलर के साथ संयुक्त रूप से सन् 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। डॉ॰ सुब्रह्मण्याम चंद्रशेखर का जन्म आज क दिन हुआ था। 18 वर्ष की आयु में उनका पहला शोध पत्र इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स में प्रकाशित हुआ था। उनकी खोजों से न्यूट्रॉन तारे और ब्लैक होल के अस्तित्व की धारणा कायम हुई, जिसे समकालीन खगोल विज्ञान की रीढ़ प्रस्थापना माना जाता है। खगोल भौतिकी के क्षेत्र में डॉ॰ चंद्रशेखर, चंद्रशेखर सीमा यानी चंद्रशेखर लिमिट के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।