August 2, 2021

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

पृथ्वी को न्याय की सबसे अधिक जरूरत-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

यूरेशिया संवाददाता

ऋषिकेश, 17 जुलाई। अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि इस समय हमारी पृथ्वी आहत है और उसे न्याय की सबसे अधिक जरूरत है, अतः इसके लिये सभी को एकजुट होेकर धरती के प्रति न्याय का समर्थन करना होगा। हम पृथ्वी के अधिकारों को बढ़ावा देंगे तभी दुनिया में शांति, सुरक्षा और सौहार्द्रता का वातावरण तैयार हो सकता है।परमार्थ निकेतन में इस्राइल दूतावास प्रभारी रोनी येडिडिया-क्लेन और उनके पति, ज्योफ पधारे। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने तिलक लगाकर वेदमंत्रों से उनका स्वागत किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में रोनी येडिडिया-क्लेन और ज्योफ ने धरती माता के अधिकारों के लिये विश्व ग्लोब का अभिषेक किया।स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि हम सभी ने जीवन में कभी न कभी शोषण, सामाजिक अन्याय, हिंसा और उत्पीड़न के कारण होने वाली पीड़ा का अनुभव किया होगा। अत्यंत पीड़ादायक होती है उत्पीड़न की स्थिति परन्तु इस समय हमारी धरती माता हर पल उत्पीड़न की पीड़ा को सहन कर रही है। हमें अपने और अपनी धरती माता के जीवन की रक्षा के लिए अपनत्व, उदारता और करुणा की अंतर्दृष्टि पैदा करनी होगी। अगर वास्तव में हम पृथ्वी पर न्याय को देखना चाहते हैं तो सर्वप्रथम पृथ्वी के साथ न्याय करना होगा। उस पर बढ़ता प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग को कम करना होगा। पृथ्वी के प्रति प्रेम, दया और करुणा के भावों को जाग्रत करना होगा तभी हमारा अन्तर्राष्ट्रीय न्याय दिवस मनाना सार्थक हो सकता है।

स्वामी जी ने कहा कि पृथ्वी पर उपलब्ध संसाधनों का कम से कम उपभोग किया जाये और इसके लिये हमें अपने ग्रीड कल्चर से नीड कल्चर की ओर तथा ग्रीड कल्चर से ग्रीन कल्चर की ओर बढ़ना होगा। आज का दिन पृथ्वी के प्रति आभार व्यक्त करने का है कि पृथ्वी हमारे लिये हमेशा उपलब्ध है। हमारे पोषण, विकास और जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूर्ण करती है, केवल हमारी ही नहीं बल्कि हमारे पूर्वजों की जरूरतों को भी पूरा किया है, सभी को जीवन दिया, सांस लेने के लिये स्वच्छ व ताजी हवा प्रदान की, अस्वस्थ होने पर जड़ी -बूटियां प्रदान की सब कुछ किया पृथ्वी ने हमारे लिये अब हमारी बारी है हम केवल हमारी सोच, विचार और व्यवहार में परिवर्तन करें तो ही विलक्षण परिवर्तन हो सकता है।  स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर सभी संस्थायें एकजुट हो कर धरती माता, माँ गंगा और सभी नदियों के अधिकारों और हितों का संरक्षण करने तथा वैचारिक प्रदूषण रोकने हेतु कार्य करेें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले ऐेसे अपराधों को रोका जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस का उद्देश्य है दुनिया में बढ़ते हुये अपराधों को रोकना। आईये सभी मिलकर एक शान्त, सुरक्षित और समृद्ध ग्रह के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें।अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के अवसर पर श्री विमल वधावन जी, सुश्री गंगा नन्दिनी त्रिपाठी, आचार्य दीपक शर्मा, परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमार ने धरती के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।