April 14, 2021

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

फरेब

लेखक: हिमांशु तोमर

जैसे-जैसे राज्य रानी एक्सप्रेस लखनऊ के चारबाग स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर 5 छोड़ रही थी वैसे वैसे ही राधा की जिंदगी में बहुत कुछ पीछे छूट रहा था। कभी उसने सोचा भी नहीं था कि उसको इस तरह चुपचाप लखनऊ छोड़कर भागना पड़ेगा। राधा का दिल बहुत दुखी था वो लखनऊ छोड़कर नहीं जाना चाहती थी क्योंकि इस शहर से उसके अतीत की बहुत सारी सुनहरी यादें जुड़ी थी लेकिन अतीत की ये सुनहरी यादें उसके लिए वर्तमान का कलंक बन गई थी। गाड़ी ने धीरे-धीरे गति पकड़ ली थी लखनऊ शहर अब पीछे छूटने लगा था। राधा के मन में थोड़ा सुकून था क्योंकि वो लखनऊ छोड़ने में कामयाब हो रही थी।राधा किनारे की सीट पर बैठ कर खिड़की से बाहर झांक रही थी मानो तेजी से पीछे छूटता लखनऊ उस पर हंस रहा हो। आखिर क्यों? ऐसा क्या हुआ था? जो राधा को इस तरह लखनऊ छोड़कर भागना पड़ रहा था। यह जानने के लिए हमको राधा की जिंदगी के कुछ पन्ने पलटने होंगे और अब से 4 साल पहले जाना होगा। जब राधा लखनऊ में नई नई आई थी और उसने नेहरू कॉलेज में अकाउंटेंट की नौकरी शुरू की थी। राधा एक शांत स्वभाव की आत्मविश्वास से भरी लड़की थी जो लोगों पर जल्दी ही भरोसा नहीं करती थी। राधा के कंधों पर एक छोटी बहन और अपनी बीमार मां की जिम्मेदारी थी पर अपने पिता के गुजर जाने के बाद बिना किसी हिचकिचाहट के वह इस जिम्मेदारी को बखूबी संभाल रही थी। धीरे-धीरे वक्त की रेत फिसल रही थी अब कॉलेज मैनेजमेंट का पूरा विश्वास राधा पर हो गया था और क्यों ना होता? राधा अपना काम पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करती थी लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उस दिन कॉलेज की फीस जमा करने का आखरी दिन था छात्र लंबी लंबी कतार लगाए फीस के काउंटरों के बाहर खड़े थे और उसी भीड़ में मौजूद एक लड़के रमन से राधा की हल्की सी नोकझोंक हुई जो एमबीए द्वितीय वर्ष का छात्र था। वो नोकझोंक उनको थोड़ा करीब ले आई और वो दोनों दोस्त बन गए रमन अपने लेक्चर छोड़कर राधा से मिलने लगा धीरे-धीरे दोस्ती और गहरी होने लगी दोनों बेवजह घंटों फोन पर बातें करने लगे और कब यह दोस्ती प्यार में बदल गई राधा को भी पता नहीं चला।यूं तो राधा जल्दी ही किसी पर भरोसा नहीं करती थी लेकिन जब इंसान के फैसलों पर से दिमाग का नियंत्रण छूटने लगे और दिल दिमाग पर हावी होने लगे तो शायद ऐसी स्थिति को ही प्यार कहा जाता है। प्यार एक अजीब एहसास है जिसके पैदा होने का किसी को पता नहीं चलता कुछ लोगों के अनुसार यह दो व्यक्तियों के बीच महज एक आकर्षण है लेकिन आकर्षण और प्यार को एक बहुत ही महीन सी रेखा अलग अलग करती है जो दिखाई नहीं देती और उस को पहचानना बहुत मुश्किल है। लेकिन राधा के लिए तो यह प्यार ही था। वो रमन को अपना सब कुछ मान चुकी थी और उसके साथ सारी जिंदगी बिताना चाहती थी हालांकि ऐसे कुछ वादे रमन ने भी राधा से किए थे।
एक दिन रमन ने राधा को फोन पर बताया कि उसके पिताजी की तबीयत बहुत खराब और वो सहारा हॉस्पिटल में भर्ती है उनके दिल का ऑपरेशन होना है जिसके लिए चार लाख रुपए की आवश्यकता है। और आज रविवार के चलते बैंक बंद होने के कारण उतने पैसे रमन के पास नहीं है वो कल तक का इंतजार नहीं कर सकता था राधा रमन से बेहद प्यार करती थी भला वो उसको परेशान कैसे देख सकती थी। राधा के पास कॉलेज की फीस के चार लाख रुपए थे जो कल उसको बैंक में जमा करने थे वो रुपए राधा ने रमन को दे दिए रमन कल बैंक में मिलने का वादा करके वहां से चला गया। अगले दिन राधा रमन का बैंक में इंतजार करती रही लेकिन रमन वहां नहीं पहुंचा। राधा बेहद परेशान थी उसकी चिंता और भी बढ़ रही थी राधा की चिंता पैसों को लेकर नहीं थी राधा की चिंता रमन के पिताजी की तबीयत को लेकर थी रमन का फोन सुबह से बंद आ रहा था। राधा रमन के हॉस्टल पहुंची तो रमन वहां भी नहीं था। कॉलेज मैनेजमेंट के लगातार फोन आ रहे थे क्योंकि फीस की नगदी अभी बैंक में जमा नहीं हुई थी। राधा का पूरा चेहरा चिंता की तेज धूप से लाल था। अब वो क्या करती?वह रमन के बारे में ज्यादा नहीं जानती थी बस वह इतना हीं जानती थी कि वह उससे प्यार करती है लेकिन रमन का घर कहां है उसके पिता क्या करते हैं वैसा कुछ उसने रमन के बारे में कभी नहीं पूछा था और क्या दो प्यार करने वाले लोगों के बीज इतना काफी नहीं है वो एक दूसरे को प्यार करते हैं। लेकिन राधा के लिए जो प्यार था वही रमन के लिए फरेब था। वह राधा से लिए पैसे जुए में हार चुका था उसको शराब और जुए की लत थी। रमन का कुछ पता नहीं चल रहा था राधा का फोन लगातार बज रहा था इस बार राधा की मां का फोन था जिन्होंने उसको बताया कॉलेज मैनेजमेंट के कुछ लोग पुलिस लेकर राधा के घर आए हैं। राधा के पास अब कोई विकल्प नहीं था । वो चारबाग रेलवे स्टेशन पर खड़ी राज्य रानी एक्सप्रेस में बैठ गई उसको कुछ पता नहीं था वह कहां जाएगी? क्या करेगी?
खिड़की से आती तेज हवा उसके आंसुओं को उसके गालों पर टिकने नहीं दे रही थी। राधा बस वो यही सोच रही थी कि आखिर उसकी गलती क्या है? गलती तो राधा से हुई थी वो इंसानों को पहचानने की कठिन परीक्षा में फेल हो गई थी और इंसानों को पहचानने का यह गूढ़ विज्ञान राधा की समझ से भी बाहर था।

(लेखक सहायक उप निरीक्षक केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के पद पर तैनात है।)