March 1, 2021

युरेशिया

राष्ट्रहित सर्वोपरि

टीका से टिकाऊ हुआ टीका (व्यंग्य)

अरुण अर्णव खरे
उन्होंने टीकाकरण से पहले टीका के डिब्बे को टीका लगाया… टीवी पर यह सीन देख कर दिल बाग़-बाग़ हो गया। ये हुई न बात… मन के भीतर से आवाज आई। हमें विश्वास हो गया कि अब विज्ञानं अपना काम करेगा। विज्ञानं और आस्था हमारे लिए हमेशा से एक दूसरे के पूरक रहे हैं पर विज्ञानं से ज्यादा भरोसा हमें अपनी आस्था पर है। हम अपनी आस्था के मुताबिक ही विज्ञानं पर भरोसा करते हैं। केवल विज्ञानं पर भरोसा करना हमें नहीं आता। इसीलिए हमने जब राफ़ेल मँगाए तो उनके उतरते ही सबसे पहला काम हमने उन पर टीका लगाने का किया। हमारा मानना है कि टीका लगने से राफ़ेल की मारक क्षमता में और वृद्धि हो गई व दुश्मन के मन में भय का भाव दोगुना हो गया।

इसे भी पढ़ें: अभी सियासी संक्रांति बाकी है (व्यंग्य)
आस्था का टीका हमारे लिए कितने महत्व का है यह हम पुरातन काल से जानते हैं। इतिहास बताता है कि युद्ध में हर योद्धा को उसकी मॉं या पत्नी टीका लगाकर ही भेजती थी जिससे उसकी बाज़ुओं में कई गुना जोश भर जाता था और दुश्मन की शामत आ जाती थी। सिर कटने के बावजूद केवल धड़ से ही घंटों युद्ध करते रहते थे हमारे पुराने जमाने के ये योद्धा। बाजुओं में जोश आ जाए तो फिर किसी की क्या बिसात जो सामने टिक जाए। बस पूर्व में हमसे यही गलती हो गई थी कि बाजुओं में जोश भरे बिना ही हमने वायरस को सबक सिखाने की ठान ली और तालियाँ बजवा दी। जैसी आशंका थी वही हुआ… तालियाँ बजीं, खूब बजीं पर कमजोर रह गईं और उनसे इतनी ऊर्जा उत्पन्न नहीं हो सकी कि वायरस भयभीत हो पाता, उलटा वह बेशर्म मेहमान की तरह घर में टिक गया। उस समय हमने ललाट पर टीका लगवा कर तालियाँ बजाने का आव्हान किया होता तो फिर फड़कती भुजाओं से निकली तालियों का असर ही कुछ अलग होता और हमें आज इस विज्ञानी टीके की जरूरत ही नहीं पड़ती। उसके पहले भी हमसे एक गलती हुई थी। उसी गलती के कारण देश में वायरस के प्रकोप से संक्रमित मरीजों की संख्या करोड़ के आंकड़े को पार गई। देश में जब पहला मरीज़ मिला था तभी हम उसे पकड़ कर माथे पर हल्दी चावल का टीका लगा देते तो उसके अंदर जा घुसे वायरस का दम वहीं निकल जाता। दम नहीं भी निकलता तो कम से कम वह दूसरे पर चिपकने लायक तो नहीं ही बचता और हमें महामारी का इतना दुखद एवं घातक स्वरूप नहीं नहीं देखना पड़ता।

इसे भी पढ़ें: वैक्सिन ले लो वैक्सिन…रंग-बिरंगी वैक्सिन (व्यंग्य)
हमारे यहाँ कहा भी जाता है कि देर आए दुरुस्त आए। सो हमने पिछली दो-दो गलतियों से सबक सीखा और उन गलतियों को सही समय पर सुधार लिया। टीका को टीका लगाकर हमने अपने टीकाकरण अभियान की शुरुआत की। डिब्बे के ऊपर आस्था का टीका क्या लगा, डिब्बे में बंद विज्ञानं के टीका में हमारी आस्था जाग गई। हमें अपनी आस्था पर हमेशा अपनी काबिलियत से ज्यादा भरोसा रहा है। टीकाकरण शुरु हुए दो दिन हो गए और कहीं से कोई शिकायत नहीं मिली… यह सुखद परिणाम आना ही था सो आ रहा है। टीका पर टीका टिप्पणी करने वाले टीका के टिकाऊ सिद्ध हो जाने से चुप हैं।

– अरुण अर्णव खरे

You may have missed

1 min read

चोरी गए वाहन क्लेम मामले में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला, बीमा कंपनी को देनी पड़ेगी ब्याज सहित क्लेम राशि दिनेश शुक्ल फरवरी 13, 2021 13:48 LIKE चोरी गए वाहन क्लेम मामले में मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला, बीमा कंपनी को देनी पड़ेगी ब्याज सहित क्लेम राशि वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता ने बताया कि बीमित वाहन के चोरी के प्रकरण में जिस कारण क्लेम निरस्त किया गया है एवं जिस कारण घटना घटित हुई है में परस्पर संबंध होना आवश्यक है। केवल तकनीकी कारण से क्लेम को निरस्त नहीं किया जा सकता। भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के खिलाफ वाहन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। दस साल की लंबी लड़ाई के बाद चोरी गए चार पहिया वाहन मालिक को ब्याज सहित क्लेम की पूरी राशि देने का उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया है। वाहन मालिक की तरफ से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता ने बताया कि फरियादी देवेंद्र सक्सेना ने एक बोलेरो जीप वर्ष 2009 में खरीदी थी। जिसका बीमा इफको टोक्यो कंपनी से कराया था। उपरोक्त वाहन 30-08-2010 की रात चोरी हो गया। जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस थाने में दर्ज कराई गई और बीमा कंपनी से आवेदक द्वारा क्लेम की राशि की मांग की गई। इसे भी पढ़ें: शिवराज सरकार सिर्फ विज्ञापनों में चला रही माफिया के खिलाफ अभियान- जीतू पटवारी लेकिन बीमा कंपनी द्वारा क्लेम इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि घटना के समय वाहन का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा था। आवेदक द्वारा बीमा कंपनी के खिलाफ प्रकरण जिला उपभोक्ता आयोग दतिया में प्रस्तुत किया गया। जिला आयोग दतिया द्वार आवेदक के परिवाद को स्वीकार कर क्लेम राशि का भुगतान किए जाने का आदेश किया था। जिसके विरुद्ध बीमा कंपनी द्वारा अपील राज्य आयोग भोपाल में की गई। राज्य आयोग भोपाल द्वारा अपने आदेश में यह व्यवस्था दी गई कि घटना एवं क्लेम निरस्तीकरण दोनों में परस्पर संबंध होना चाहिए। चोरी के प्रकरण में वाहन के व्यवसायिक उपयोग का आधार स्वीकार योग्य नहीं है। इसे भी पढ़ें: मध्य प्रदेश में बढ़ी गिद्धों की संख्या, पर्यावरण संरक्षक गिद्धों की हुई थी गणना आयोग द्वारा बीमा कंपनी की अपील निरस्त कर जिला फोरम का आदेश यथावत रखा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता ललित कुमार गुप्ता ने बताया कि बीमित वाहन के चोरी के प्रकरण में जिस कारण क्लेम निरस्त किया गया है एवं जिस कारण घटना घटित हुई है में परस्पर संबंध होना आवश्यक है। केवल तकनीकी कारण से क्लेम को निरस्त नहीं किया जा सकता।